Tuesday, December 3, 2019

तो क्या अब ख़त्म हो जाएगा अनलिमिटेड कॉल का दौर?

भारत के टेलीकॉम बाज़ार में तीन-चार साल पहले तक लगभग 10 कंपनियां मौजूद थीं. इनके बीच अच्छी प्रतिद्वंद्विता थी जिसके चलते सस्ते टैरिफ़ प्लान ग्राहकों को मिलते थे, उन्हें कई आकर्षक ऑफ़र चुनने को मिल जाते थे.

लेकिन जब रिलायंस जैसे बड़ी कंपनी ने जियो को बाज़ार में उतारा तो उन्होंने बहुत आक्रामक तरीक़े से अपना प्रचार किया. उन्होंने बाकी सभी कंपनियों के मुक़ाबले अपने प्लान को सबसे ज़्यादा सस्ता रखा. लोग उनकी ओर आकर्षित होते चले गए और बाकी कंपनियों का साथ छूटता चला गया.

इन तीन चार साल में जियो के ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती गई जबकि बाज़ार में मौजूद बाकी टेलीकॉम कंपनियां ग़ायब होती चली गईं और अब सिर्फ़ चार कंपनियां ही हमारे सामने रह गई हैं.

इन चार में से भी एक कंपनी बीएसएनएल है, जिसका हाल किसी से छिपा नहीं है. वह बाज़ार में है भी या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता. तो मोटे तौर पर जियो के अलावा सिर्फ़ दो ही प्रमुख कंपनियां हैं, एयरटेल और वोडाफ़ोन. बाज़ार का यह हाल चिंताजनक है.

दूरसंचार उद्योग की स्थिति पर आशंकाओं को और बढ़ाते हुए भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल वोडाफ़ोन-इंडिया को दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड 74,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है.

एक अरब से अधिक मोबाइल ग्राहकों के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाज़ारों में से एक है. इसके बावजूद कंपनी को जो नुकसान हो रहा है वो वाकई चिंता का विषय है. ऐसे में कंपनियों ने कुछ क़दम उठाए हैं.

एयरटेल और वोडाफ़ोन को अपने टैरिफ़ प्लान के रेट बढ़ाना बहुत ज़्यादा ज़रूरी हो गया था. जैसे हालात उनके सामने बने हुए हैं, उनके स्पैक्ट्रम के ख़र्चे लगातार बढ़ रहे हैं.

इस वजह से इन कंपनियों को हर तिमाही में नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर ये कंपनियां अपने टैरिफ़ प्लान में बदलाव किए बिना ही आगे बढ़ती जातीं तो इनका बाज़ार में बने रह पाना ही नामुमकिन सा हो जाता और तब सिर्फ़ जियो अकेला बाज़ार में रह जाता.

अगर इस तरह के हालात के बारे में सोचें तो इन टैरिफ़ प्लान में हुए बदलाव को अच्छा ही माना जाना चाहिए. क्योंकि बाज़ार में प्रतिस्पर्धा लगातार कम होती जा रही है. ऐसे में इन कंपनियों को मिलकर ही फ़ैसला करना था.

जियो के पीछे एक बहुत बड़ी कंपनी का हाथ था. उसके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी. यही वजह है कि उसने ग्राहकों को अपनी तरफ़ खींचने के लिए लुभावने ऑफ़र उपलब्ध करवाए.

भारत में टेलीकॉम का व्यापार बहुत महंगा माना जाता है. इसमें स्पैक्ट्रम का ख़र्च, स्पैक्ट्रम को इस्तेमाल करने का अलग ख़र्च, नेटवर्क स्थापित करने का ख़र्च शामिल होता है.

इससे भी बड़ी बात यह है कि भारत में प्रति यूज़र जो औसत आय है वह बहुत कम है. इसका मतलब है कि भारत में लोग मोबाइल पर बहुत कम ख़र्च करना चाहते हैं.

भारत में एक आम आदमी का औसतन महीने का मोबाइल बिल 100-150 रुपए तक आता है. यह दुनिया में सबसे कम ख़र्च है. इतने कम ख़र्च में किसी तरह की टेलीकॉम कंपनी का चलना बहुत ही मुश्किल है.

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